रांची। स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त शहर के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से शनिवार को EuroKids Pre-School, Kokar के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने जागरूकता रैली निकाली। कोकर बाजार से अखड़ा कोचा तक आयोजित इस रैली में बच्चों ने स्वच्छता से जुड़े संदेशों वाली तख्तियां लेकर लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक किया।
रैली में रांची की मेयर रोशनी खलखो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने बच्चों के साथ कदम से कदम मिलाकर रैली में हिस्सा लिया और स्वच्छता से जुड़े नारों के माध्यम से लोगों को अपने आसपास का वातावरण साफ रखने का संदेश दिया।

बच्चों की पहल बनी आकर्षण का केंद्र
नन्हे बच्चों ने सिर पर स्वच्छता संदेश लिखी टोपी पहन रखी थी और हाथों में जागरूकता संदेश वाली तख्तियां थीं। बच्चों की इस पहल ने राहगीरों और स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित किया। रैली के माध्यम से बच्चों ने लोगों से कूड़ा खुले में न फेंकने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
मेयर रोशनी खलखो ने बच्चों की पहल की सराहना करते हुए कहा कि बदलाव की शुरुआत छोटी-छोटी कोशिशों से होती है। यदि हर मोहल्ले के लोग अपने आसपास सफाई रखने की जिम्मेदारी निभाएं, तो रांची को और सुंदर एवं स्वच्छ बनाया जा सकता है।

सफाई अभियान में स्थानीय लोगों की भागीदारी
कार्यक्रम के दौरान कोकर वार्ड-10 में सफाई अभियान भी चलाया गया। वार्ड पार्षद संगीता देवी और पूर्व पार्षद अर्जुन यादव के नेतृत्व में अभियान को आगे बढ़ाया गया। वार्ड सुपरवाइजर धीरज कुमार और उनकी टीम ने भी सफाई अभियान में सहयोग किया।
रैली को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संचालित करने में रामलखन सिंह यादव कॉलेज, कोकर के NSS और NCC के विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों के साथ रैली में भाग लिया और मार्ग पर अनुशासन एवं यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया।

नुक्कड़ नाटक के जरिए दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान EuroKids की शिक्षिकाओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल और कचरा फैलाने से होने वाले नुकसान को समझाया। बच्चों और स्थानीय लोगों को यह संदेश दिया गया कि प्लास्टिक का अनावश्यक इस्तेमाल कम करना और कचरे का उचित निपटान करना पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है।
स्कूल प्रबंधन की ओर से कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
बच्चों की इस पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि स्वच्छता की सीख केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है। आज के बच्चे यदि पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति जागरूक होंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और स्वस्थ शहर का निर्माण किया जा सकेगा।



